हमारा स्मारक : एक परिचय

श्री टोडरमल जैन सिद्धांत महाविद्यालय जैन धर्म के महान पंडित टोडरमल जी की स्मृति में संचालित एक प्रसिद्द जैन महाविद्यालय है। जिसकी स्थापना वर्ष-१९७७ में गुरुदेव श्री कानजी स्वामी की प्रेरणा और सेठ पूरनचंदजी के अथक प्रयासों से राजस्थान की राजधानी एवं टोडरमल जी की कर्मस्थली जयपुर में हुई थी। अब तक यहाँ से 36 बैच (लगभग 850 विद्यार्थी) अध्ययन करके निकल चुके हैं। यहाँ जैनदर्शन के अध्यापन के साथ-साथ स्नातक पर्यंत लौकिक शिक्षा की भी व्यवस्था है। आज हमारा ये विद्यालय देश ही नहीं बल्कि विदेश में भी जैन दर्शन के प्रचार-प्रसार में संलग्न हैं। हमारे स्मारक के विद्यार्थी आज बड़े-बड़े शासकीय एवं गैर-शासकीय पदों पर विराजमान हैं...और वहां रहकर भी तत्वप्रचार के कार्य में निरंतर संलग्न हैं। विशेष जानकारी के लिए एक बार अवश्य टोडरमल स्मारक का दौरा करें। हमारा पता- पंडित टोडरमल स्मारक भवन, a-4 बापूनगर, जयपुर (राज.) 302015

Saturday, June 19, 2010

बचपन नहीं मरा करता है


छिप-छिप अश्रु बहाने वालों, मोती व्यर्थ लुटाने वालों...


कुछ सपनों के मर जाने से जीवन नहीं मरा करता है...

खोता कुछ भी नहीं यहाँ पर,


केवल जिल्द बदलती पोथी,


जैसे रात उतार चांदनी...


पहने सुबह धूप की धोती....


वस्त्र बदलकर आने वालों, चाल बदलकर जाने वालों,


चंद खिलौनों के खोने से...बचपन नहीं मरा करता है...

Monday, June 7, 2010

स्मारक की वेबसाइट: एक नयी सम्भावना

बढता युग और इस युग में आने वाली नयी संभावनाए और तकनीकों के साथ चलना बहुत ज़रूरी हैं. और इसीलिए हमारा अपना स्मारक शायद एक नयी सम्भावना बनता हुआ बहुत जल्द लौंच करने जा रहा हैं अपनी वेबसाइट एक आमूल चूल परिवर्तन के साथ जो शायद आपने सोचा भी न हों. क्यूंकि स्मारक का मैनेजमेंट ये अच्छी तरह जानता हैं की स्मारक की वेबसाइट उनके लिए एक नया gateway हो सकता हैं न सिर्फ इंडिया में तत्त्व प्रचार के लिए बल्कि विदेशों में भी. अभी सुन्दर वेबसाइट के साथ शुरुआत करके आगे-आगे देखो होता हैं क्या वाली बात नज़र आ रही हैं. जिस तरह हमारा यह ब्लॉग उभर कर सामने आया हैं, वैसे ही वेबसाइट एक बड़े रूप में आ सकती हैं. उस वेबसाइट में क्या-क्या होगा, यह हम सब के लिए surprise हैं, पर यह वेबसाइट हमारे लिया नयी संभावना साबित हों सकती हैं जिसमे हमारी जब भी ज़रुरत होगी, तब बता दिया जायेगा! क्यूंकि मार्केटिंग तोह हमे ही करनी हैं, और कौन करेगा.

आप अपनी प्रतिक्रिया ज़रूर दीजिये.

Thursday, June 3, 2010

नागपुर शिविर का place map जारी...


१२ जून से २० जून तक आयोजित होने वाले नागपुर शिविर का मेप जारी कर दिया गया है...ये कुल ५१ स्थानों पार आयोजित होगा....
संपर्क सूत्र-
प्रवेश भारिल्ल- +91-98939-30165 or +91-99070-७४३६५
सजल जैन- 07828909025

Tuesday, June 1, 2010

दिया तले अँधेरा

इस खबर की हेडिंग आपको थोड़ी गंभीर लग सकती हैं पर बात इतनी ही हैं की जिस प्रकार राज्य सर्कार, केंद्र सर्कार के अंतर्गत काम करती हैं, उसी प्रकार किसी भी कंपनी की शाखाये भी headoffice से तालमेल बिठाकर रख आगे बडती हैं. पर देश भर में सर्व मान्य संस्था टोडरमल स्मारक में एक चीज़ की कमी हमेशा से थी और वह थी छोटे बालक-बालिकाओं के लिए पाठशाला का न होना.

पर इस कड़ी को तोड़ते हुए federation की जयपुर महानगर शाखा ने इस साल समर कैंप के नाम से बच्चों को इक्कठा कर उन्हें जैन संस्कार देने के साथ-साथ, चित्र कला, लेखन कला आदि की शिक्षाएं भी दी. इसी के साथ बच्चों को रोज़ कोई न कोई तरह का उपहार भी दिया गया. मात्र ५ बच्चों से शुरुआत कर शाखा ने ५० बच्चे इक्कठे किये और अपने इस अनूठे कार्य में सफल हुए.

इसमें सबसे महत्वपूर्ण कार्य रहा हैं- संजय जी शास्त्री- बड़ामल्हरा, गजेन्द्र जी शास्त्री और अनेक शाखा के सदस्यों का.

आप सब भी इस तरह के आईडिया से अपने एरिया में काम करे और बच्चों को धार्मिक संस्कारो के साथ और भी कला में निपुण कर उसको एक समर कैंप की तरह चला कर उन्हें आकर्षित करे. और ख़ुशी की बात यह हैं की अब हमारा केंद्र जयपुर भी इस काम में आगे हैं और निरंतर बढता रहेगा.

Monday, May 31, 2010

देवलाली प्रशिक्षण शिविर सानंद संपन्न

हर साल की तरह इस साल भी पाठशालाओं में अध्यापन की मुख्यता से शिक्षकों के निर्माण हेतु आयोजित होने वाला प्रशिक्षण शिविर देवलाली में संपन्न हुआ। इस शिविर में १८ दिनों के प्रशिक्षण के उपरांत कुशल अध्यापकों का निर्माण किया जाता है। साथ ही पूजन, प्रवचन आदि जरुरी गतिविधियाँ भी नियमित तौर पर संचालित होती है। ये शिविर जैनदर्शन के लब्धप्रतिष्ठित विद्यालय टोडरमल स्मारक में प्रवेश हेतु विद्यार्थियों के लिए प्रवेश पात्रता शिविर भी है। जहाँ टोडरमल स्मारक में अध्ययन हेतु विद्यार्थियों का चयन भी किया जाता है।

इस शिविर में पंडित रातान्चंदजी भारिल्ल, डॉ हुकुमचंद भारिल्ल, ब्र सुमतप्रकाशजी, पंडित अभयजी, दिनेश भाई, उज्ज्वला बेन, पंडित शान्तिकुमार पाटिल, कोमलचंदजी, कमलचंदजी जैसे विद्वानों का लाभ प्राप्त हुआ। शिविर के मध्य में डॉ.भारिल्ल की हीरक जयंती महोत्सव का समापन, स्नातक परिषद् की संगोष्ठी, जैन युवा फेडरेशन का अधिवेशन भी हुआ। इसके साथ ही डॉ.भारिल्ल के सम्मान में २४ मई को एक कवि सम्मलेन भी आयोजित हुआ जिसमें सञ्चालन के लिए प्रतिष्ठित राष्ट्रीय कवि जुग्रज्जी मुंबई को आमंत्रित किया गया। जुगराज जी के अतिरिक्त परमात्म प्रकाशजी, अध्यात्मप्रकाशजी, अभयजी देवलाली, प्रकाशजी, बाबुलालजी खुरई, अरुणजी शास्त्री, गणतंत्र ओजस्वी और अंकुर जैन ने भी अपनी कवितायेँ प्रस्तुत की।
शिविर में डॉ.भारिल्ल के समयसर पर और सुमतप्रकाशजी के पञ्च भाव पर प्रवचन खासे पसंद किये गए।